मुंबई-जैन कनेक्ट संवाददाता | जैन साध्वियों ने साहस और तपस्या का एक नया कीर्तिमान स्थापित करते हुए हिमाचल प्रदेश स्थित विश्व प्रसिद्ध अटल टनल को पैदल पार किया। यह कारनामा किसी आम यात्रा का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह एक अद्वितीय आध्यात्मिक और शारीरिक तप का परिचायक बना। श्री निधी महाराज ठाणे_2 के नेतृत्व में साध्वियों ने कठिन पर्वतीय मार्गों से गुजरते हुए यह साहसिक यात्रा पूरी की।
🔹 शिमला से प्रारंभ हुआ आध्यात्मिक विहार श्री निधी महाराज ठाणे_2 ने 30 मार्च को शिमला से अपने विहार की शुरुआत की थी।
🧭 रिकांग पीओ से होते हुए काजा की ओर वहां से वे 10 अप्रैल के बाद दुर्गम पहाड़ी रास्तों से होते हुए काजा की ओर विहार कर गए थे।
🌕 बुद्ध पूर्णिमा तक काजा में ठहराव साध्वियों ने बुद्ध पूर्णिमा तक काजा में विराजमान रहते हुए तपस्या और साधना की।
🚫 टनल पार करने में सामने आई बाधा 22 मई को अटल टनल पार करने से पहले उन्हें 4 घंटे तक इंतजार करना पड़ा क्योंकि पैदल प्रवेश की अनुमति नहीं थी।
🪑 वाहन में बैठने से साध्वियों का इंकार साध्वियों ने अपनी परंपरा अनुसार किसी वाहन में बैठने से स्पष्ट मना कर दिया।
📜 डीसी से मिली विशेष अनुमति इसके बाद उपायुक्त (DC) से विशेष अनुमति ली गई ताकि साध्वियों को टनल पैदल पार करने की अनुमति दी जा सके।
🛡️ सुरक्षा कर्मियों के साथ यात्रा सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन ने उनके साथ सुरक्षा कर्मी भेजे ताकि यात्रा सुरक्षित तरीके से पूरी हो सके।
⏱️ पौने दो घंटे में पूरी की टनल यात्रा साध्वियों ने लगभग पौने दो घंटे में टनल को पैदल पार कर इतिहास रच दिया।
🚶♀️ प्रतिदिन कर रहीं 35–40 किमी का विहार ये साध्वियाँ प्रतिदिन लगभग 35 से 40 किलोमीटर का विहार कर रही हैं, जो अत्यंत अनुकरणीय है।
🏅 साध्वीवृंद की अनुमोदना दोनों साध्वियों की इस असाधारण तप और धैर्य की जितनी अनुमोदना की जाए, वह कम है।
इस प्रेरणादायक यात्रा ने यह सिद्ध कर दिया कि संकल्प, तप और विश्वास के साथ कोई भी बाधा पार की जा सकती है। अटल टनल जैसी संरचना को भी साध्वीवृंद ने अपनी निष्ठा से पार करते हुए एक मिसाल कायम की है।

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