मुंबई–जैन कनेक्ट संवाददाता | आधुनिक उद्यमिता की दौड़ में जहाँ मुनाफा अक्सर उद्देश्य को पछाड़ देता है, वहीं श्री राजत ग्रुप के संस्थापक डॉ. विजय जैन एक नई परिभाषा रच रहे हैं—जो आध्यात्मिक दर्शन, सामाजिक सेवा और व्यावसायिक प्रबंधन का उत्कृष्ट संगम है। राजस्थान के ब्यावर में जन्मे डॉ. जैन का सफर एक सामान्य विद्यार्थी से वैश्विक व्यवसायी और जैन शास्त्रों के विद्वान बनने तक का रहा है, जो संघर्ष, समर्पण और सिद्धांतों से प्रेरित है।
👇 आइए जानें उनकी प्रेरक जीवन यात्रा के प्रमुख पहलुओं को:
🎓 शैक्षणिक योग्यता से मिली नई दिशा डॉ. विजय जैन ने एम.कॉम प्रथम श्रेणी में अजमेर के एमडीएस विश्वविद्यालय से किया और बाद में जैनोलॉजी में पीएचडी पूरी की।
💎 हीरे के बाजार से व्यवसाय की शुरुआत साल 2000 में मुंबई के डायमंड मार्केट से अपने करियर की शुरुआत की, लेकिन जल्द ही पारिवारिक व्यवसाय की ओर मुड़ गए।
🪨 पिता के साथ संगमरमर व्यापार में 8 वर्ष अपने पिता श्री प्रकाशचंद जैन के साथ मिलकर संगमरमर व्यवसाय में आठ वर्षों तक कार्य किया।
😢 पिता के निधन से जीवन में बड़ा मोड़ 2008 में पिता के आकस्मिक निधन ने जीवन की दिशा बदल दी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
🏆 श्री राजत ग्रुप की स्थापना से वैश्विक पहचान शून्य से शुरुआत करते हुए डॉ. जैन ने श्री राजत ग्रुप को भारत और विदेशों में प्रतिष्ठा दिलाई।
📚 जैन धर्मशास्त्र में शोध और योगदान तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय, मुरादाबाद से जैन धर्म, पर्यावरण चेतना और अहिंसा पर आधारित शोध कार्य किया।
🙏 गुरु व आध्यात्मिक शक्ति से मिली प्रेरणा गुरु रूपमुनिजी महाराज और इसरो वैज्ञानिक डॉ. सुरेन्द्र पोखरना से मार्गदर्शन प्राप्त किया।
🎬 फिल्म निर्माण में भी किया नवाचार मीडिया क्षेत्र में कदम रखकर यह साबित किया कि सृजनशीलता की कोई सीमा नहीं होती।
❤️ मानव सेवा को मानते हैं सच्चा धर्म शिक्षा और आत्मनिर्भरता के क्षेत्र में महिलाओं और बच्चों की मदद करना इनकी प्राथमिकता है।
🕊️ सादा जीवन, ऊँचे विचार: आदर्श रतन टाटा व्यवसाय में श्री रतन टाटा को अपना आदर्श मानते हैं, जिनकी सादगी और नैतिकता उन्हें प्रेरित करती है।
डॉ. विजय जैन की कहानी केवल एक सफल व्यवसायी की नहीं है, बल्कि एक ऐसे व्यक्ति की है जिसने आध्यात्मिकता, शिक्षा और सेवा को जीवन की मूल दिशा बना लिया। उन्होंने सिद्ध कर दिया कि यदि उद्देश्य स्पष्ट हो और मार्गदर्शन सच्चा हो, तो कोई भी व्यक्ति वैश्विक मंच तक पहुँच सकता है।

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