बिजनौर–जैन कनेक्ट संवाददाता | दिगंबर जैन मुनि श्रीसा सागर महाराज एवं मुनि पदम नवसागर महाराज ने बिजनौर के दिगंबर जैन मंदिर में जैन समाज को संबोधित करते हुए जीवन में अहिंसा, सेवा, और ईमानदारी को सर्वोपरि बताया। मुनिश्री ने अपने प्रभावशाली प्रवचनों में आत्मनिरीक्षण, कर्म सिद्धांत और गांधीजी के तीन बंदरों के संदेश को समझाते हुए समाज को प्रेरित किया। इस अवसर पर नगर में उनका भव्य स्वागत हुआ और प्रवचन के उपरांत वे धामपुर की ओर प्रस्थान कर गए।
🔔 प्रवचनों की दिव्यता से गूंजा मंदिर परिसर मुनि श्रीसा सागर और मुनि पदम नवसागर महाराज के प्रवचनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
🕊️ अहिंसा परमो धर्म का दिया संदेश मुनिश्री ने कहा कि जैन धर्म की मूल आत्मा अहिंसा है और यही जीवन को पवित्र बनाती है।
🤲 सेवा को बताया सच्चा धर्म उन्होंने समाजसेवा को आत्मिक उन्नति का सबसे बड़ा माध्यम बताते हुए इसके निरंतर अभ्यास की प्रेरणा दी।
🪞 आत्मनिरीक्षण की दी सीख “सभी बातें मालूम हैं, पर स्वयं से प्रसन्न नहीं हैं” — इस वाक्य से आत्ममंथन की भावना को बल मिला।
🙈🙉🙊 गांधीजी के तीन बंदरों का दिया उदाहरण “बुरा मत देखो, बुरा मत सुनो, बुरा मत कहो” — इस मूल मंत्र को जीवन में अपनाने पर बल दिया गया।
💬 वाणी और मन की शुद्धता पर बल कम बोलने, सकारात्मक बोलने और निंदा से बचने का संदेश दिया गया।
📿 पुण्य संचय का महत्त्व बताया मुनिश्री ने कहा कि मनुष्य पुण्य लेकर जन्म लेता है, परंतु इसे सोच-समझकर खर्च करना चाहिए।
🛕 नगर में हुआ भव्य स्वागत जैन समाज द्वारा नगर आगमन पर मुनिश्रियों का स्वागत उत्साहपूर्वक किया गया।
🚶 धामपुर प्रस्थान पर अनुयायियों की विदाई यात्रा स्योहारा से ग्राम सरकड़ा तक समाज के युवाओं ने मुनिश्रियों को भावभीनी विदाई दी।
👥 समाज के वीरों की सक्रिय भागीदारी अशोक जैन, संजय जैन, संजीव जैन, शोभित जैन समेत अनेक समाजसेवियों ने व्यवस्था में योगदान दिया।
इस प्रवचन कार्यक्रम ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि समाज को आत्मचिंतन और नैतिकता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। मुनिश्री के विचार आने वाली पीढ़ियों के लिए दिशासूचक बनेंगे।

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