नागदा–जैन कनेक्ट संवाददाता | नागदा में आयोजित एक विशेष बहुमान समारोह में दीक्षार्थी गौरव जाट ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि जैन धर्मग्रंथों का अध्ययन करते हुए उनके मन में संयम जीवन अपनाने की तीव्र भावना जागृत हुई। अजैन परिवार में जन्मे गौरव ने जैन सिद्धांतों को अपनाते हुए आत्मकल्याण का मार्ग चुना और दीक्षा की अनुमति प्राप्त करने के लिए डेढ़ वर्ष तक संयमित जीवन का अभ्यास किया। अब वे 5 जून को बदनावर में आचार्य उमेशमुनिजी के आज्ञानुवर्ती जिनेन्द्र मुनिजी की निश्रा में दीक्षा ग्रहण करेंगे।
🔖 जैन ग्रंथों से मिली जीवन की दिशा गौरव जाट ने बताया कि जैन धर्मग्रंथों को पढ़ते हुए ही उनके मन में संयम लेने का भाव उत्पन्न हुआ।
🙏 संयम जीवन की ओर पहला कदम लगभग डेढ़ वर्ष तक संयम की राह पर चलकर गौरव ने आत्मशुद्धि का मार्ग अपनाया और दीक्षा की आज्ञा प्राप्त की।
🧘 चातुर्मास में धर्म आराधना का संकल्प गौरव ने आचार्य के सान्निध्य में चातुर्मास के दौरान अधिक से अधिक धर्म आराधना करने का लक्ष्य रखा।
🪷 अजैन होकर भी अपनाया जैन धर्म यद्यपि गौरव अजैन परिवार से हैं, परन्तु संस्कारों के प्रभाव से उन्होंने जैन पथ को आत्मसात किया।
📿 दीक्षा का शुभ अवसर 5 जून को बदनावर में 5 जून को वे जिनेन्द्र मुनिजी के सान्निध्य में संयम जीवन की दीक्षा ग्रहण करेंगे।
🎉 भव्य बहुमान समारोह का आयोजन नवकार सोशल ग्रुप और जैन सोशल ग्रुप के सहयोग से जीवदया मानव सेवा समिति परिसर में गौरव जाट का अभिनंदन किया गया।
👑 शाल, माला और पगड़ी पहनाकर सम्मान समारोह में गौरव को शाल, माला, और पगड़ी पहनाकर उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी गईं।
🚩 जय-जयकार के साथ जुलूस बसंतीलाल कोलन के निवास से समिति परिसर तक दीक्षार्थी का स्वागत जयघोषों के साथ किया गया।
📢 गौरवशाली उद्बोधन समारोह में कमलनयन चपलोत, शरद जैन, अमित बम, धर्मेन्द्र बम, और सतीश जैन ने भावपूर्ण उद्बोधन दिए।
🎙️ संचालन में समर्पित योगदान समारोह का संचालन कमल जैन सहारा द्वारा कुशलता से किया गया।
गौरव जाट की दीक्षा यात्रा यह प्रमाणित करती है कि आत्मा का उत्थान किसी जाति या पंथ की सीमाओं में नहीं बंधा होता। धर्म और संयम का मार्ग हर किसी के लिए खुला है — बस उसके लिए श्रद्धा, संकल्प और साधना की आवश्यकता होती है।

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