मुरैना–जैन कनेक्ट संवाददाता | श्री दिगंबर बड़ा जैन मंदिर, मुरैना में चल रहे श्री सिद्धचक्र विधान के सातवें दिन मुनि विलोकसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए जीवन के सुख-दुख, ज्ञान-अज्ञान और आत्मचिंतन जैसे गूढ़ विषयों पर विचार रखे। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि व्यक्ति के जीवन में आने वाले सभी कष्टों और कठिनाइयों का मूल कारण उसकी अपनी अज्ञानता है। मुनिश्री के आध्यात्मिक प्रवचनों ने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया।
🧘 अज्ञानता ही दुखों का मूल कारण मुनिश्री ने कहा कि हमारे सुख-दुख के लिए कोई और जिम्मेदार नहीं, बल्कि हमारी खुद की अज्ञानता है।
🌀 जीवन को जटिल और मृत्यु को सस्ती मानना अज्ञान व्यक्ति जीवन को बोझ समझता है और मृत्यु को सस्ता, यही उसकी सबसे बड़ी विडंबना है।
🗣️ प्रशंसा और आलोचना का रहस्य कुछ लोगों की प्रशंसा और कुछ की आलोचना के पीछे उनके कर्म और आत्मज्ञान की भूमिका है।
😔 आत्मवंचना से भरा जीवन मुनिश्री ने कहा कि हम अपने भीतर के अंधकार को पहचान नहीं पाते, इसलिए जीवन की खाई बढ़ती जाती है।
🧠 ज्ञानी बनो, निंदनीय नहीं अज्ञानी व्यक्ति हर स्थान पर उपेक्षित होता है, जबकि ज्ञानी सर्वत्र आदर पाता है।
🔥 विश्व शांति महायज्ञ का आयोजन रविवार को विधान के अंतिम दिन विश्व शांति के उद्देश्य से महायज्ञ का आयोजन किया जाएगा।
🚩 शोभा यात्रा का आयोजन महायज्ञ उपरांत श्री जिनेंद्र प्रभु की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें श्रद्धालुओं की भागीदारी रहेगी।
🛕 पाण्डुक शिला पर कलशाभिषेक शोभायात्रा के पश्चात प्रभु का कलशाभिषेक कर विशेष पूजन संपन्न होगा।
🙏 टिकटोली क्षेत्र हेतु निवेदन टिकटोली क्षेत्र समिति युगल मुनिराजों को श्रीफल भेंट कर अतिशय क्षेत्र आगमन के लिए आमंत्रण देगी।
👥 समाज की संगठित श्रद्धा राजेंद्र भंडारी, ओमप्रकाश जैन और सतेंद्र जैन के नेतृत्व में साधर्मी समाज समर्पण भाव से सहभागी होगा।
मुनि विलोकसागर महाराज के चिंतनपरक प्रवचनों ने मुरैना के जैन समाज को आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया। अज्ञान को दूर कर आत्मज्ञान की ओर बढ़ने का यह आह्वान सिद्धचक्र विधान की सार्थकता को और अधिक गहराई प्रदान करता है।

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