अटाली-जैन कनेक्ट संवाददाता | राजस्थान के आसींद कस्बे में मंगलवार को जैन समाज ने आध्यात्मिक इतिहास रचते हुए एक भव्य दीक्षा समारोह का आयोजन किया। इस समारोह की विशेष बात यह रही कि एक ही परिवार के चार सदस्यों– पति, पत्नी, पुत्र और पुत्री – ने एक साथ सांसारिक जीवन त्याग कर वैराग्य का मार्ग अपनाया।
🛕 900 वर्ष प्राचीन मंदिर में ध्वजारोहण ऋषभदेव जैन मंदिर ट्रस्ट के अनुसार, सुबह 7 बजे 900 साल पुराने मंदिर पर ध्वजा चढ़ाने की परंपरा का शुभारंभ हुआ।
🥁 परंपरागत परिक्रमा के साथ ध्वजा यात्रा लाभार्थियों ने सिर पर ध्वजा लेकर ढोल-नगाड़ों के साथ मंदिर की तीन परिक्रमा की, जिससे वातावरण भक्तिमय हो गया।
🏔️ 70 फीट ऊंचे शिखर पर मुख्य ध्वजा आरोहण मुख्य ध्वजा को 70 फीट ऊंचे शिखर पर सुबह 9:15 बजे स्थापित किया गया, साथ ही 32 अन्य शिखरों पर भी ध्वजाएं चढ़ाई गईं।
🧘 चार नवदीक्षितों की दीक्षा प्रक्रिया सुबह 10:15 बजे आचार्य पुंडरीक रत्न सूरी के सान्निध्य में चार साधकों की दीक्षा विधि आरंभ हुई।
📿 नवदीक्षितों के नाम और उपाधियाँ भवविरह विजय महाराज, वचन सिद्धी महाराज, वचन शुद्धि महाराज और सिद्धी दर्शनाश्री महाराज के रूप में चारों को नवजीवन प्राप्त हुआ।
🕉️ 8 वर्षों की साधना बनी प्रेरणा यह परिवार पिछले 8 वर्षों से ऋषभदेव जैन मंदिर में नियमित रूप से पूजा-अर्चना कर रहा था, जिससे उन्हें वैराग्य की प्रेरणा मिली।
🌸 लाभार्थी परिवार का सम्मान प्रीतमबेन संदीपभाई सिंघवी और भावना बेन प्रभुदास शाह के परिवार को श्री संघ की ओर से विशेष सम्मान प्रदान किया गया। हजारों श्रद्धालु इस पावन अवसर के साक्षी बने।
🙏 समाज में वैराग्य की भावना को नई दिशा इस आयोजन ने समाज में वैराग्य और धर्म के प्रति जागरूकता का संदेश दिया और लोगों को आत्मिक शुद्धि की ओर प्रेरित किया।
दीक्षा समारोह में आत्मिक उन्नति, भक्ति और पारिवारिक त्याग की मिसाल देखने को मिली। एक ही परिवार के चारों सदस्यों द्वारा एक साथ संन्यास धारण करना न केवल समाज में चर्चा का विषय बना, बल्कि धर्म के प्रति दृढ़ आस्था और समर्पण की प्रेरक कथा भी बन गई।

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