मुंबई-जैन कनेक्ट संवाददाता | मुंबई महानगरपालिका (BMC) द्वारा विलेपार्ले स्थित 90 वर्ष पुराने पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को ढहाए जाने के बाद पूरे देश के जैन समुदाय में तीव्र रोष फैल गया है। बुधवार को हुई इस कार्रवाई के खिलाफ शुक्रवार सुबह विलेपार्ले में सर्वदलीय अहिंसक रैली का आयोजन किया गया, जिसमें कई राजनीतिक नेता, संतगण और हजारों की संख्या में जैन समाज के लोग शामिल हुए। मंदिर के ट्रस्टियों ने प्रशासन पर न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा न करने और अवैध रूप से मंदिर तोड़ने का आरोप लगाया है।
🛕 पढ़ें इस विवाद से जुड़ी अहम बातें :
📍 90 साल पुराने मंदिर को ढहाया गया कांबळीवाडी, विलेपार्ले में स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर को बीएमसी द्वारा बुधवार को ढहा दिया गया, जिससे समाज में आक्रोश फैल गया।
🪔 संतों और नेताओं की मौजूदगी में विरोध रैली मंत्री मंगलप्रभात लोढा, विधायक पराग अळवणी और कई जैन संतों ने मिलकर सुबह 9:30 बजे अहिंसक विरोध रैली निकाली।
⚖️ बीएमसी पर न्यायालय की अवहेलना का आरोप जैन समाज ने आरोप लगाया कि मंदिर के मामले में सुनवाई गुरुवार को होनी थी, लेकिन बीएमसी ने एक दिन पहले ही कार्रवाई कर दी।
📜 मंदिर ट्रस्ट ने पहले ही दाखिल की थी याचिका मंदिर ट्रस्टियों ने बताया कि उन्होंने उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की थी, जिसकी जानकारी बीएमसी को थी।
🔍 फैसले से पहले की गई जल्दबाज़ी ट्रस्टियों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से आग्रह किया था कि कोर्ट के फैसले तक रुकें, लेकिन उनकी बात को नजरअंदाज कर दिया गया।
🗣️ दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग जैन समाज ने इस मामले में शामिल अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है और निष्पक्ष जांच की अपील की है।
🪷 न्याय की प्रतीक्षा किए बिना गिराया मंदिर अनिल शाह समेत कई ट्रस्टियों ने कहा कि बीएमसी ने जानबूझकर कोर्ट की प्रक्रिया की अनदेखी की और जल्दबाज़ी में कदम उठाया।
🛑 राजनीतिक दल भी आए समर्थन में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस कार्रवाई की आलोचना की और जैन समाज को न्याय दिलाने का आश्वासन दिया।
🙏 निषेध से पहले की गई आरती मंदिर स्थल पर विरोध प्रदर्शन से पूर्व श्रद्धालुओं ने आरती कर भगवान का स्मरण किया और शांति का संदेश दिया।
❓ कार्रवाई किस आदेश से हुई? समाज ने सवाल उठाया कि यह कार्रवाई किसके निर्देश पर हुई, जब मामला अभी न्यायिक प्रक्रिया में था?
इस घटना ने जैन समाज को गहरे आहत किया है और मुंबई में धार्मिक संरचनाओं की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। विलेपार्ले में जुटे हजारों लोगों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आस्था और अधिकार की रक्षा की मांग की। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार और प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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